नरेंद्र मोदी कॉकरोचों से क्यों हार गए……
- In Current Affairs
- 09:45 AM, Jul 26, 2026
- Pramod Kumar Buravalli
एक बड़े झटके ने भारतीय जनता पार्टी की नींव को हिला दिया है।
धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है और विपक्ष को 12 सालों में पहली बार खून की महक आ रही है…..
और अगर कोई यह समझता है कि यह अस्थायी है या सिर्फ NEET की वजह से हुआ है, तो वे बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी में हैं! यही वजह थी कि 2024 में उन्हें तथाकथित 400 पार के बजाय 240 का जनादेश मिला, और इसके बावजूद भी कोई ठोस आत्ममंथन नहीं किया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने पार्टी और सरकार के हर स्तर पर चाटुकारिता और घटिया प्रदर्शन को बढ़ावा देकर यह खुद ही किया है!
उन्होंने जीवन भर कांग्रेस पर इसी चाटुकारिता का आरोप लगाया कि वे नीतियों, योजनाओं, स्टेडियमों और सार्वजनिक स्थानों आदि अपने या नेहरू-गांधी परिवार के नाम पर रखते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद पीएम मोदी ने क्या किया??
नरेंद्र मोदी स्टेडियम, नमो यात्री ट्रेन, यहाँ नमो, वहाँ नमो....., क्या लोगों को यह साफ़-साफ़ अपने स्वयं की महिमामंडन करने की कोशिश नहीं दिखती?
भाजपा के किसी भी कट्टर समर्थक से पूछिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इन 12 सालों में उन्होंने क्या अनुभव किया। बाहर से तो वे तारीफ़ के पुल बांधते रहते हैं लेकिन अंदर ही अंदर वे इस बात से बहुत नाखुश रहते हैं कि पार्टी आखिरकार क्या बन गई है-
• भ्रष्ट
• उदासीन
• पैसे की भूखी
• प्रतिभा दबाने वाली
• कांग्रेस की हूबहू नकल
और भ्रष्टाचार व भारत को तोड़ने वाली NGO के ख़िलाफ़ कार्रवाई तथा बड़े पैमाने पर रोज़गार पैदा करने के हवा-हवाई वादों की लंबी-चौड़ी लिस्ट—इन सभी को भगवान राम के नाम पर बड़ी आसानी से भुला दिया गया...
वो विनम्र स्वयंसेवक कहाँ चले गए? जिनकी सादगी और स्पष्ट सोच ने 1998 से 2014 के बीच मध्यम वर्ग को भाजपा की ओर आकर्षित किया था??
ये पाँच सितारा होटलों में घूमने वाले सेवक कौन हैं जो ज़मीनी स्तर पर संवाद करने की कला खो चुके हैं और राष्ट्र सेवा की मूल भावना को ही भूल गए हैं?
यह वो भाजपा नहीं है जिसके लिए मैंने वोट दिया था….
“न तो भाजपा और न ही इंदिरा गांधी या पी. वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली कांग्रेस ऐसे कॉकरोचों या दीमकों के आगे नहीं झुकती—चाहे उनके पीछे तथाकथित ‘डीप स्टेट’ का समर्थन हो या न हो।”
हम जीने के लिए रील्स और छोटे वीडियो बनाते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी को यह दिखाने में मुझे खुशी होगी, कि
किसी की जबरन प्रशंसा किए बिना भी नैरेटिव कैसे बदला जा सकता है।
इंडिया इंदिरा नहीं है।
भारत नमो भारत नहीं है।
जय हिंद
जय श्री राम

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