- Jun 04, 2026
- Alkesh Patel
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दुनिया की भावी सुरक्षा के लिए ये दो पुस्तकें मील का पत्थर साबित हो सकती हैं
दुनिया की भावी सुरक्षा के लिए ये दो पुस्तकें मील का पत्थर साबित हो सकती हैं… और इस बात को समझने के लिए सबसे पहले इस कथन को पढ़ें- “सभ्यताएं केवल सेना के बल पर नहीं हारतीं, बल्कि वे तब टूट जाती हैं जब वे सभ्यताएं अपने दरवाजे भेदकर अंदर घुस चुके विचारों को पहचानने में विफल हो जाती हैं।” – यह कथन एक ऐसी लेखिका का है जो पिछले कई दशकों से इस्लाम पर बहुत गहराई से शोध कर रही हैं। मूल रूप से कनाडा की रहने वाली लेखिका एलेन एलिंगर (Elaine Ellinger) ने पिछले दो वर्षों में दो पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें इस्लाम के बारे में, विशेष रूप से जिहादी मानसिकता के संबंध में व्याप्त मतभेदों का व्यापक शोध के साथ विश्लेषण किया गया है। एलेन अमेरिका और यूरोप सहित पश्चिमी देशों को इस्लाम के विभिन्न पहलुओं, विशेष रूप से शरिया प्रथा और उसके कारण पश्चिमी देशों में बदल रही स्थिति के बारे में काफी समय से सचेत कर रही हैं। इसके लिए वे शोध-पत्र प्रकाशित कर रही हैं और व्याख्यान दे रही हैं। राजनेताओं की वोट-बैंक की नीति के विरुद्ध चेतावनी एलेन एलिंगर विशेष रूप से पश्चिमी राजनेताओं को सावधान करने का प्रयास कर रही हैं क्योंकि राजनेताओं की वोट-बैंक की नीतियों के कारण मुस्लिमों को शरण दी जाती है। कनाडाई लेखिका एलेन एलिंगर का कहना है कि शरण लेने के बाद स्थानीय लोगों और संस्कृति के साथ घुलने-मिलने के बजाय, वे अपनी आबादी बढ़ने का इंतजार करते हैं और फिर शरिया लागू करना शुरू कर देते हैं। एक संगठित समुदाय बनकर ये लोग संबंधित देश के कानून को मानने से साफ इनकार कर देते हैं और अपने खुद के कानून लागू करने का दबाव बनाते हैं। और फिर उसके बाद क्या होता है, यह सब जानते हैं। इसी संदर्भ में एलेन ने दो पुस्तकें लिखी हैं: A Civilizational Reckoning: Understanding the Threat, Reclaiming the Future (2025) तथा The Hidden Curriculum of Islamic Schools: From Prayer to Sharia – A Child’s Indoctrination (2026)। ये पुस्तकें पश्चिमी देशों के लिए तो आंखें खोलने वाली हैं ही, लेकिन भारत सहित पूर्वी देशों के लिए भी एक अग्रिम चेतावनी की तरह हैं। लेखिका अपनी पुस्तक ‘ए सिविलाइजेशनल रेकनिंग’ में स्पष्ट शब्दों में कहती हैं कि शरिया वास्तव में 7वीं शताब्दी की एक कानूनी व्यवस्था है। अर्थात इसका पंथ, संप्रदाय या धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। कुछ समय पहले एक वीडियो इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि, "सच्चाई यह है कि बहुत बड़ी संख्या में मुस्लिम और विशेषकर मुस्लिम महिलाएं खुद इन सब बातों से अनजान हैं और वे घुटन महसूस करती हैं।" ‘ए सिविलाइजेशनल रेकनिंग: अंडरस्टैंडिंग द थ्रेट, रिक्लेमिंग द फ्यूचर’ पुस्तक के बारे में: ‘ए सिविलाइजेशनल रेकनिंग’ (A Civilizational Reckoning) पुस्तक में इस बात का व्यापक विश्लेषण किया गया है कि कैसे शरिया – जो 7वीं शताब्दी की एक कानूनी व्यवस्था है – पश्चिमी संस्कृति, संस्थानों और स्वतंत्रता को दृश्य और अदृश्य दोनों तरीकों से छिन्न-भिन्न करके नया आकार दे रही है। प्राथमिक इस्लामिक स्रोतों के संदर्भों के साथ व्यापक शोध के आधार पर लिखी गई यह पुस्तक किसी के प्रति नफरत फैलाने के बजाय वास्तव में महत्वपूर्ण मार्गदर्शक सैद्धांतिक स्पष्टता और कानूनी समाधान प्रदान करती है; जो नीति निर्माताओं, विद्वानों और नागरिकों को अन्य समुदायों के मानव अधिकारों और स्वतंत्रता के सामने खड़े इस गंभीर चुनौतीपूर्ण संकट को समझने और उसका सामना करने में सक्षम बनाती है। ‘द हिडन करिकुलम ऑफ इस्लामिक स्कूल्स: फ्रॉम प्रेयर टू शरिया – अ चाइल्ड्स इंडोक्ट्रिनेशन’ पुस्तक के बारे में: इसी तरह ‘द हिडन करिकुलम ऑफ इस्लामिक स्कूल्स: फ्रॉम प्रेयर टू शरिया – अ चाइल्ड्स इंडोक्ट्रिनेशन’ पुस्तक के बारे में’ पुस्तक में कक्षा 1 से 12 तक के इस्लामिक स्कूलों के पाठ्यक्रम की विस्तृत समीक्षा की गई है। एलेन एलिंगर ने वैसे तो बहुत सारे इंटर्व्यु दिए है, लेकिन इस विषय पर उनकी पूरी चिंता और दुनिया को सावधान करने के उनके प्रयासो को समझने के लिए यह दो इंटर्व्यु सबको देखने चाहिएः 1 - https://youtu.be/0eD__2kf68I?si=mfxT99jVnqCorIHV 2 - https://youtu.be/b2yRlasfOvM?si=ZdYFwONdsKSil-jt पाठ्यपुस्तकों, वर्कबुक, पूरक पठन पुस्तकों, हदीस, तफसीर, फिकह मैनुअल और अन्य बुनियादी इस्लामिक स्रोतों से सीधे जानकारी लेकर यह पुस्तक इस बात की समीक्षा करती है कि मुस्लिम बच्चों को पहचान, आज्ञाकारिता, गैर-मुस्लिमों, जिहाद, शरिया, लैंगिक भूमिका, सत्ता और व्यापक विश्व के बारे में क्या सिखाया जाता है। प्रत्येक शैक्षणिक कक्षा के आधार पर किए गए इस विश्लेषण में जानकारी छिपाने की पद्धति, चुनिंदा रूपरेखा, व्यावहारिक अनुकूलन और वैचारिक कट्टरता के लिए बार-बार दोहराए जाने वाले ढर्रे की समीक्षा की गई है। इस पाठ्यक्रम की तुलना कुरान, प्रामाणिक हदीस संग्रह, इब्न कसीर, अल-तबरी, इब्न इसहाक और ‘रिलायंस ऑफ द ट्रैवलर, अ क्लासिक मैनुअल ऑफ इस्लामिक सेक्रेड लॉ’ सहित प्राथमिक इस्लामिक स्रोतों से की गई है। यह तुलना दर्शाती है कि कैसे जटिल कानूनी और सैद्धांतिक अवधारणाओं को दोहराव, धार्मिक अनुष्ठानों और कहानी सुनाने के माध्यम से बच्चों में धीरे-धीरे सुदृढ़ कर दिया जाता है। सामान्य पाठकों और शोधकर्ताओं दोनों के लिए सरल भाषा में लिखी गई यह पुस्तक वास्तव में एक अध्ययन दस्तावेज है कि कैसे इस्लामिक शैक्षणिक सामग्री वैश्विक दृष्टिकोण, सामुदायिक पहचान और गैर-मुस्लिमों के प्रति दृष्टिकोण को आकार देती है। यहाँ महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि इसके साथ ही यह पुस्तक विद्यार्थियों और इसका अध्ययन करने वालों को बुनियादी ग्रंथों में पाए जाने वाले कई कानूनी, राजनीतिक और ऐतिहासिक परिणामों की जानकारी से पूरी तरह दूर रखती है। कौन हैं एलेन एलिंगर? जैसा कि शुरुआत में बताया, एलेन एलिंगर एक कनाडाई शोधकर्ता, लेखिका और शिक्षक हैं। वे इस्लामिक सिद्धांतों और उनके परिणामों का अध्ययन करके विशेष रूप से गैर-मुस्लिमों और साथ ही संवेदनशील मुस्लिमों को परोक्ष रूप से सावधान करती हैं। 1983 में जब उन्होंने शरणार्थियों के साथ बातचीत शुरू की, तब इस विषय में उनकी रुचि जागी और वे शोध की दिशा में आगे बढ़ीं। उन्होंने 80 से अधिक लेख लिखे हैं, अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में वक्तव्य दिए हैं और इस्लाम के ही आधिकारिक स्रोतों का उपयोग करके शरिया, जिहाद और दावा के वैचारिक आधार का विवरण देने वाली शैक्षणिक वीडियो श्रृंखला तैयार की है। एलेन ‘पर्सपेक्टिव्स ऑन इस्लाम’ की संस्थापक हैं और पहले ‘सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ पॉलिटिकल इस्लाम इंटरनेशनल’ में कनाडाई निदेशक के रूप में सेवा दे चुकी हैं। उनकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि पश्चिमी संस्थानों और व्यवस्थाओं जैसे कि मीडिया, स्कूलों, अदालतों और सरकारों के भीतर शरिया की पहुंच बढ़ रही है, और इसके बावजूद राजनेता इस सिद्धांत की आलोचनात्मक जांच करने में विफल हो रहे हैं।- Jun 04, 2026
- Viren S Doshi
